जीरकपुर की रैली बयां कर गई थी डेराबस्सी का परिणाम

dhillon pic. जीरकपुर, 29 जनवरी, 2012: कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ रहे दीपइंदर सिंह ढिल्लों की जीरकपुर रैली में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र के सभी समीकरणों को उथल पुथल कर रख दिया है। क्षेत्र में बाहरी उम्मीदवार को भगाने और क्षेत्र के अस्तित्व को बचाने के लिए लोगों का समर्थन पूरी तरह से ढिल्लों को मिल रहा है।  इस मौके पर नगर काउंसिल के पूर्व प्रधान और अकाली नेता जगजीत सिंह डाली, अकाली काउंसलर नरेश सैनी और कई अन्य कांग्रेसी एवं अकाली नेता भी उपस्थित थे। इस मौके पर राजपूत समाज, मेहरा समाज, सैणी समाज, हिंदू वेलफेयर बोर्ड, पूर्वांचल सभा, यूपी बिहार वेलफेयर मंच आदि विभिन्न समाज सेवी एवं राजनीतिक एवं धार्मिंक तथा सांस्कृतिक संगठनों के समर्थन से विरोधी उम्मीदवारों की नींद उड़ चुकी है।

दीपइंदर ढिल्लों द्वारा अन्य उम्मीदवारों के बाद जीरकपुर में बलटाना रोड स्थित कलगीधर इक्लेव में जो विशाल रैली की गई, वह उनके जनसमर्थन का विशाल शक्ति प्रदर्शन साबित हुआ। इस रैली स्थल पर पहले हो चुकी कांग्रेस और अकाली दल की रैलियां भी इस रैली के सामने फीकी पड़ गई हैं। रैली की सफलता से उत्साहित होकर ढिल्लों समर्थकों ने जीत का दावा करते हुए कहा है कि ढिल्लों की जीत तो हो चुकी है, अब तो बस ऐलान ही बाकी है।

एक तरफ क्षेत्र में बीते 20 साल से कांग्रेस पार्टी

के लिए जीजान से काम करते आ रहे दीपइंदर ढिल्लों की टिकट काट दिए जाने के कारण क्षेत्र के लोगों की हमदर्दी पूरी तरह से ढिल्लों के साथ है। वर्कर और स्थानीय नेता आजाद उम्मीदवार दीपइंदर ढिल्लों के पक्ष में चल रहे हैं। क्षेत्र के पुराने कांग्रेसी और अकाली परिवार भी ढिल्लों के साथ चल रहे हैं। अकाली परिवार भी कैप्टन कंवलजीत सिंह के परिवार को नजरअंदाज किए जाने के कारण अकाली दल से नाराज हैं और वे ढिल्लों के हक में चल रहे हैं।

इन समीकरणों से स्पष्ट है कि मुख्य मुकाबला अकाली दल और आजाद उम्मीदवार दीपइंदर ढिल्लों के बीच में ही है। कांग्रेस उम्मीदवार को तो चुनाव प्रचार के लिए पुराने कांग्रेसी नेता या वर्कर तक नहीं मिल पा रहे हैं। बीते दिनों पंजाब कांग्रेस के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह जीरकपुर में रैली करने आए तो कांग्रेसी वर्करों की भीड घन्नौर, राजपुरा एवं अन्य शहरों से लाई गई।

इसी रैली में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ढिल्लों को पार्टी से बाहर निकालने का ऐलान किया और ढिल्लों के साथ चल रहे कांग्र्रेसी नेताओं को पार्टी से बाहर निकालने की चितावनी के बावजूद भी पुराने कांग्रेसी वर्कर ढिल्लों के समर्थन में ही चल रहे हैं। क्षेत्र की अनेक पिछड़ी जातियों और वर्गों ने भी दीपइंदर ढिल्लों को भी समर्थन दे दिया है।

एक्स सर्विसमैन वेलफेयर सोसायटी के प्रधान कर्नल जे.एस.सोढ़ी, गुरचरण सिंह छत्त, ध्यान सिंह झरमड़ी, पिक्की संधू, बीबी रूपिंदर कौर ढिल्लों, हरजीत सिंह मिंटा, रङ्क्षवदर जैन, रविंदर सिंह ईसापुर, दलित चेतना मंच के प्रधान शमशेर सिंह पुरखालवी, भारती किसान यूनियन के नेता बलदेच यिंह अमलाल भी ढिल्लां के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

जीरकपुर रैली में जम्मू कश्मीर के आजाद विधायक चौधरी अनवर सिंह, बिहार के पूर्व मंत्री ददन सिंह और उिल्ली से गुज्जर संगठन के नेताओं ने भी दीपइंदर सिंह ढिल्लों के लिए वोट डालने की अपील करते हुए  उनकी स्थिति मजबूत कर दी है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आजाद उम्मीदवार दीपइंदर सिंह ढिल्लों कांग्रेस और अकाली दल के दोनों उम्मीदवारों के लिए जीत की राह में बड़ी बाधा बन चुके हैं।

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